Wednesday, October 15, 2008

shayari2

इश्क की धुप में साए भी जल जाते हैं ,
है गर्मी इसमें इतनी कि पत्थर भी पिघल जाते हैं ,
मेरे दिलो - दिवार से न उतारो तस्वीर अपनी -
इन अश्को की बारिश में घरोंदें भी बह जाते हैं

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